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Kim and Putin meet in Russia- 17 वर्ष पहले कभी यहीं पर किम के पिता से मिले थे पुतिन, जानें किम से मुलाकात के मायने (Relevant for GS Prelims & Mains Paper II; IOBR)

रूस का शहर व्लादिवोस्तोक एक बार फिर पूरी दुनिया के लिए सुर्खियां बटोर रहा है। इसकी वजह उत्तर कोरिया के प्रमुख किम जोंग उन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की एतिहासिक मुलाकात है। यह दोनों नेता पहली बार मिल रहे हैं। हालांकि इससे पहले पुतिन ने 23 अगस्त 2002 को इसी शहर में किम के पिता और तत्कालीन उत्तर कोरियाई प्रमुख किम जोंग इल से मुलाकात की थी। उस वक्त भी यह मुलाकात मीडिया की सुर्खियों में थी। जहां तक किम और उनके पिता की बात है तो दोनों में काफी कुछ मेल खाता है। किम जोंग इल ने भी अपने कार्यकाल के दौरान काफी कम विदेश यात्राएं की थीं। इतना ही नहीं वह भी चीन, रूस और जापान के अलावा शायद ही कहीं गए थे। ठीक वैसे ही किम भी इन देशों के आगे अब तक नहीं निकले। हालांकि, यह बात अलग है कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होने वाली शिखर वार्ता के लिए पहले सिंगापुर और फिर हनोई गए थे।

मीडिया का जमावड़ा
अब किम जोंग उन अपने विदेशी रिश्तों को दोबारा से धार देने में लगे हैं। इसी वजह से बुधवार को वह चीन के बाद रूस से अपने पुराने रिश्तों को दोबारा तरोताजा बनाने के लिए पहुंचे थे। गुरुवार को  जब उन्होंंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से एतिहासिक मुलाकात की तो यकायक ये शहर फिर सुर्खियों में आ गया। इस पल को अपने कैमरे में कैद करने के लिए यहां पर कई देशों की मीडिया का जमावड़ा भी था। वहीं कई देशों खासकर अमेरिका की निगाह भी इस बैठक पर लगी थी। आखिर हो भी क्यों नहीं किम अमेरिका के चिर-परिचित प्रतिद्वंदी से मुलाकात जो कर रहे थे।

मुलाकात के खास मायने
किम की पहले चीन और अब रूस की यात्रा के बेहद खास मायने हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि चीन और रूस काफी लंबे समय से उत्तर कोरिया के साथी रहे हैं। इतना ही नहीं प्रतिबंधों के बाद भी यह दोनों देश किसी न किसी तरह से उत्तर कोरिया की मदद करते रहे हैं। अमेरिका से तनाव के बीच भी इन दोनों ने उत्तर कोरिया से अपने संबंध मधुर बना रखे थे। हालांकि, रूस पिछले कई सालों से उत्तरी कोरिया पर अपना परमाणु कार्यक्रम रोकने के लिए दबाव बनाता रहा है। रूस 2009 में इसके लिए हुई छह देशों अमेरिका, जापान, चीन, उत्तरी कोरिया और दक्षिण कोरिया की हुई बैठक में शामिल था।

आठ वर्ष बाद मुलाकात
आपको यहां पर ये भी बता दें कि किम जोंग उन के सत्ता में आने के बाद ये उनकी पहली रूसी यात्रा है। गौरतलब है कि दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों की यह मुलाकात आठ वर्ष बाद हो रही है। इससे पहले 24 अगस्त 2011 को किम जोंग इल की रूसी प्रमुख दिमित्री मेदवेदेव से मुलाकात हुई थी। किम जोंग उन ने चीन की अपनी पहली यात्रा भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से सिंगापुर में होने वाली मुलाकात से ठीक पहले की थी। इसके अलावा हनोई यात्रा से पहले भी उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिन से मुलाकात की थी। वहीं अब जबकि किम और ट्रंप की तरफ से तीसरी मुलाकात की बात कही जा रही है तो उत्तर कोरिया के प्रमुख चीन के बाद रूस पहुंचे हैं। किम ने व्लादिवोस्तोक की यह यात्रा अपने चिरपरिचित अंदाज में ट्रेन से ही की है। इसके लिए पहले वह उत्तर कोरिया की सीमा से सटे रूसी इलाके खासन तक पहुंचे थे। यहां से वो व्लादिवोस्तोक पहुंचे। यहां पर उनका पारंपरिक तौर से स्वागत किया गया।

समर्थन जुटाने की है कोशिश
यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब उत्तर कोरिया ने हाल ही में नया रॉकेट टेस्ट करने का दावा किया है। आपको बता दें कि अमेरिका ने अब तक भी उत्तर कोरिया से प्रतिबंध नहीं हटाए हैं, ऐसे में किम विदेश यात्राओं के जरिए अपने प्रति समर्थन जुटाने की कोशिश में लगे हैं। जहां तक पुतिन और किम की मुलाकात की बात है तो अभी तक इसके समय का खुलासा नहीं हुआ है लेकिन, रूसी अखबार कॉमरसैंट ने इसके 25 अप्रैल को होने की बात कही है। इस मुलाकात से पहले किम के खास सलाहकार किम चांग सुन 21 अप्रैल को व्लादिवोस्तोक गए थे।

दक्षिण कोरिया का रुख
इस मुलाकात को लेकर दक्षिण कोरिया का कहना है कि रूस और उत्तरी कोरिया के बीच होने वाली इस मुलाकात में दोनों देशों के संबंधों के अलावा परमाणु कार्यक्रम पर रोक और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। दक्षिण कोरिया का कहना है कि रूस और हमारी सोच एक जैसी है। हम भी चाहते हैं कि कोरियाई प्रायद्वीप पूरी तरह से परमाणु मुक्त हो और यहां शांति कायम हो। उम्मीद है कि इस मुलाकात से एक सकारात्मक विकास की एक उम्मीद मिलेगी।

किम-ट्रंप की मुलाकात
किम की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ट्रम्प से वियतनाम की राजधानी हनोई में दो महीने पहले मुलाकात हुई थी लेकिन यह बैठक बेनतीजा रही थी। इससे पहले इन दोनों के बीच पिछले वर्ष मुलाकात हुई थी। यह दोनों ही मुलाकात लगभग बेनतीजा रही हैं। इसकी वजह थी कि किम चाहते थे कि उनके देश पर लगे प्रतिबंधों को खत्म किया जाए, लेकिन इस पर अमेरिका राजी नहीं था।

(Adapted from Jagran.com)



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