भारत स्टेज उत्सर्जन मानक

भारत स्टेज उत्सर्जन मानक (Bharat stage emission standards, बीएसईएस) केंद्र सरकार द्वारा मोटर वाहनों सहित आंतरिक दहन इंजन उपकरणों से वायु प्रदूषण के उत्पादन को नियंत्रित करने के लिए 2000 में स्थापित किए गए थे। विभिन्न मानदंड केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा स्थापित समयरेखा और मानकों के अनुसार लागू किए जाते हैं जो पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) के अंतर्गत आता है। बीएसईएस मानदंड यूरोपीय नियमों पर आधारित हैं।

13 प्रमुख शहरों में, बीएस- IV (BS-IV) उत्सर्जन मानकों को अप्रैल 2010 में स्थापित किया गया था। अप्रैल 2017 से देश भर में बीएस-IV मानदंड प्रभावी हुए थे। बीएस-V (BS-V) मानक का कार्यान्वयन पहले 2019 के लिए निर्धारित किया गया था। यह अब छोड़ दिया गया है। बीएस-VI, पहले 2024 तक लाने का प्रस्ताव था; अब इसे 2020 कर दिया गया है।

बीएस-VI को पूर्वित करना महत्वपूर्ण क्यों है?
1. दिल्ली जैसे शहर पहले से ही सबसे अधिक प्रदूषित हवा वाले शहरों में सूचीबद्ध हैं।
2. अन्य विकासशील देश जैसे चीन कुछ समय पहले ही यूरो-V उत्सर्जन मानदंडों के बराबर सुधार कर चुका हैं, भारत पीछे छूट चुका है।
3. चीन और मलेशिया जैसे देशों के अनुभव (जो वर्तमान में धुंध से जूझ रहे हैं) से पता चलता है कि हवा की खराब गुणवत्ता व्यापार के लिए खराब हो सकती है।

बीएस-VI अनुवर्ती ईंधन बीएस-IV की तुलना में कम प्रदूषण क्यों उत्पन्न करता है?
बीएस–IV और बीएस-VI (जो यूरो 6 के बराबर है) के बीच मुख्य अंतर ईंधन में सल्फर की मात्रा में है। बीएस-VI ईंधन में 80% कम सल्फर सामग्री है - 50 भाग प्रति मिलियन (parts per million, पीपीएम) से 10 पीपीएम तक। बीएस-IV पेट्रोल और डीजल में सल्फर का 50 पीपीएम है; बीएस-III मानकों के तहत पेट्रोल के लिए 150 पीपीएम और डीजल के लिए 350 पीपीएम की तुलना में।

बीएस-VI अनुवर्ती ईंधन की पेशकश से एनओएक्स उत्सर्जन (NOx emissions) भी कम हो जाएगा। डीजल इंजन वाहनों से एनओएक्स उत्सर्जन लगभग 70% और पेट्रोल इंजन वाहनों से लगभग 25% तक कम हो जाएगा।

बीएस–VI मानदंडों के पूर्वित कार्यान्वयन में क्या चुनौतियां हैं?
1. पूरे देश को बीएस-IV में स्थानांतरित करने में सात साल लग गए। इस बार सरकार बीएस-V को छोड़कर और सीधे बीएस-VI पर जाने की कोशिश कर रही है। कार्यान्वयन के वर्ष को भी 2020 तक पूर्वित कर दिया है।
2. बीएस– VI ईंधन की पेशकश से लाभ केवल तभी मिलेगा जब यह बीएस– VI अनुवर्ती वाहनों में किया जाएगा। बीएस-IV वाहनों में बीएस–VI ईंधन का उपयोग करना या इसके विपरीत, बीएस-VI इंजनों में बीएस-IV ईंधन का उपयोग वाहन प्रदूषण को रोकने में अप्रभावी हो सकता है। विसंगति लंबे समय में इंजन को नुकसान भी पहुंचा सकती है।
3. बीएस-IV ग्रेड ईंधन और वाहनों की 13 शहरों में आंशिक पेशकश में दोष निहित है। लोग बीएस-III वाहन पसंद करते थे जो बीएस-IV वाहनों से सस्ते थे। बीएस-III वाहनों को नामित बीएस-IV शहरों की परिधि के बाहर पंजीकृत किया जा सकता था। बसों और ट्रकों जैसे भारी वाहनों के लिए कोई विकल्प नहीं था। उन्हें बीएस-III इंजनों के साथ रहने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि शहरों के बाहर ईंधन बीएस- IV मानदंडों के अनुरूप नहीं था। ये वाहन प्रदूषण में प्रमुख योगदानकर्ता हैं।
4. बीएस-IV में पूरा अवस्थांतर होने में 2010 से अप्रैल 2017 तक लिया गया था, क्योंकि तेल रिफाइनरियां आवश्यक मात्रा में बीएस-IV ईंधन का उत्पादन करने में असमर्थ थीं। तेल रिफाइनरियों ने बीएस-IV ईंधन उत्पादन के लिए करीब `30,000 करोड़ का निवेश किया। ऐसा माना जाता है कि ऑटोमोबाइल उद्योग ने समान निवेश किया है। तेल कंपनियों को बीएस-VI में सुधार करने के लिए और `40,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की आवश्यकता हो सकती है। ऑटोमोबाइल उद्योग को `50,000 करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता हो सकती है। वाहन निर्माताओं द्वारा अतिरिक्त निवेश अनिवार्य रूप से वाहनों की कीमतें बढ़ा देगा।
5. बीएस-VI अनुवर्ती डीजल इंजन को अतिरिक्त घटक की आवश्यकता होगी अर्थात् डीजल पार्टिकुलेट फ़िल्टर (डीपीएफ) जो बोनेट की लंबाई को बढ़ा देगा। कार की लंबाई कार पर लगाए गए कर निर्धारित करती है और इस प्रकार, बीएस-VI अनुवर्ती डीजल कार महंगी होगी, जो इन वाहनों की बिक्री में बाधा डाल सकती है।
6. इसके अलावा, भारत की कम गति वाली ड्राइविंग स्थितियों में डीपीएफ लागू करना मुश्किल है। कम ड्राइविंग गति पर, डीपीएफ में मौजूद सूट (कार्बन अपशिष्ट) जलाने के लिए आवश्यक 600 डिग्री सेल्सियस का उच्च तापमान प्राप्त करना मुश्किल होता है। नतीजतन, कार निर्माताओं को 400 डिग्री सेल्सियस पर काम करना होता है। आमतौर पर, डीजल को तापमान बढ़ाने के लिए डाला जाता है, लेकिन डीपीएफ में अतिरिक्त ईंधन की वजह से आग लग सकती है।
7. इसके अतिरिक्त, बीएस-VI वाहनों को सेलेक्टिव कैटालिटिक रिडक्शन (Selective Catalytic Reduction, एससीआर) मॉड्यूल के साथ लगाया जाएगा। इसका अनुकूलन करने में अनुमानित तीन-चार साल लग सकते है।
8. मोटर उत्पादकों के लिए, सीधे बीएस-IV से बीएस-VI मानदंडों में स्विच करने में बड़ी बाधा गाड़ियों को दो प्रमुख उपकरणों अर्थात् डीजल पार्टिकुलेट फ़िल्टर और सेलेक्टिव कैटालिटिक रिडक्शन से लैस करने और समय सारिणी के भीतर सड़क परीक्षण करने में निहित है। वाहन का पूरी तरह से परीक्षण किया जाना चाहिए। इसके लिए 6-7 लाख किमी से अधिक सत्यापन परीक्षण की आवश्यकता होगी, जिसमें चार साल तक लग सकते हैं।

Also read:   Bharat Stage Norms, Why has Maruti decided to stop making diesel cars?, BS-VI emission norms for vehicles: So near and yet so far, here is whyAdvancing BS-VI emission normsCentre notified (BS) VI norms for vehicles



hi_INहिन्दी
en_USEnglish hi_INहिन्दी