हमने IAS परीक्षा की तैयारी के बारे में सबसे बड़े मिथकों को सूचीबद्ध किया है।

मिथक 1
मुझे छठी कक्षा से बारहवीं कक्षा तक सभी NCERT पुस्तकें पढ़ने की आवश्यकता है?
न तो N.C.E.R.T किताबें पढ़ने की आवश्यकता है और न ही सभी पुस्तकों को पढ़ना और सीखना संभव है।

बल्कि, यह सबसे बड़ा मिथक है कि UPSC परीक्षा में NCERT पुस्तकों के ज्ञान की आवश्यकता है। पिछले कुछ वर्षों में, UPSC परीक्षा का स्तर इतना उच्च हो गया है कि NCERT पुस्तकों से कुछ ही सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं।

इसके अलावा, NCERT पुस्तकों को पूरा करने में एक वर्ष से अधिक समय लगता है। इस प्रकार, हम NCERT पुस्तकें पढ़ने के सुझाव की पूरी तरह से अवहेलना करते हैं। इसके बजाय, हम दृढ़ता से दावा करते हैं कि PrepMate-Cengage पुस्तक श्रृंखला NCERT पुस्तकों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक है, जिनसे सीखना आसान है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह परीक्षा के दृष्टिकोण से प्रासंगिक हैं।

मिथक 2
मैं न तो किसी कक्षा का टॉपर रहा हूं और न ही मैं मेधावी छात्र हूं। IAS केवल टॉपर्स के लिए है?
IAS की परीक्षा आपके व्यक्तित्व का परीक्षण है, बुद्धि का नहीं। इसके लिए दृढ़ संकल्प, एक उत्सुक मन, लगातार कड़ी मेहनत और अच्छे मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है और हम आपका मार्गदर्शन करने का वादा करते हैं।

मिथक 3
एक इंटरव्यू में एक टॉपर ने कहा कि उसने 365 दिन 16 घंटे पढ़ाई की। क्या ये सच है?
प्रतिदिन 16 घंटे अध्ययन करना मानवीय रूप से असंभव है। परीक्षा की तैयारी के लिए रोजाना 7 घंटे और अधिक का अध्ययन पर्याप्त है। इसके अलावा, परीक्षा की तैयारी के शुरुआत में अधिक प्रयास की जरूरत होती है।

मिथक 4
मैं किसी कारणवश दिल्ली नहीं जा सकता/सकती। इसलिए मैं परीक्षा की तैयारी नहीं कर सकता/सकती।
निश्चित रूप से, यह निम्नलिखित कारणों से गलत है।
1. ऐसे कई उम्मीदवार हैं जो आत्म-अध्ययन करके सिविल सेवा की परीक्षा में सफलता प्राप्त करते हैं।
2. विभिन्न क्षेत्रों में कई कोचिंग संस्थान हैं जो बहुत अच्छी तरह से अपना काम कर रहे हैं।
3. इंटरनेट की सहायता से छात्र को घर पर पढ़ाई के साधन उपलब्ध हैं। 

मिथक 5
परीक्षा को पास करने के लिए भाग्य की जरूरत है।
सफलता 1% भाग्य और 99% मेहनत पर निर्भर करती है। कभी भी 1% भाग्य के साथ 99% कड़ी मेहनत का सौदा न करें। भाग्य के हर औंस को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करें।

मिथक 6
लाखों उम्मीदवार परीक्षा देते हैं लेकिन कुछ ही परीक्षा को पास कर पाते हैं। मुझे कोई मौका नहीं मिलेगा।
हालांकि लाखों अभ्यर्थी इस परीक्षा के लिए फॉर्म भरते हैं लेकिन वास्तविक प्रतियोगिता केवल 3000 से 4000 उम्मीदवारों में होती है। जो सही रणनीति के साथ और एक उपयुक्त स्रोत के माध्यम से लगातार अध्ययन करते हैं, वे प्रशासनिक सेवाओं में आ जाते हैं। 

मिथक 7
IAS, सिविल सेवा परीक्षा और UPSC परीक्षा, क्या तीनों का मतलब एक ही है?
सिविल सेवा परीक्षा लगभग 24 सरकारी सेवाओं के लिए संयुक्त परीक्षा है। IAS उनमें से एक है। भारतीय प्रशासनिक सेवाएं (IAS) के साथ कुछ अन्य सेवाएं, भारतीय पुलिस सेवा (IPS), भारतीय राजस्व सेवाएं (IRS) इत्यादि हैं। UPSC वह आयोग है जो सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करता है।

मिथक 8
कुछ कहते हैं कि IAS परीक्षा के पाठ्यक्रम की कोई सीमा नहीं है।

एक बहुत बड़ी 'ना'। UPSC सख्ती से सिलेबस का पालन करता है। हालांकि पाठ्यक्रम के अंदर, यह किसी भी विशेष विषय की महत्वता को बढ़ा या कम कर सकता है।

मिथक 9
मैं परीक्षा के लिए कुछ महत्वहीन विषयों को पूरी तरह से छोड़ सकता/ सकती हूं?
UPSC में उन विषयों से प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति होती है, जिसे छात्रों द्वारा उनका उचित महत्व नहीं दिया जाता है। आप के लिए हमारा सुझाव है कि पाठ्यक्रम के किसी भी भाग को बिना तैयारी के न छोड़े।

मिथक 10
IAS परीक्षा के लिए पाठ्यक्रम बहुत व्यापक है। मैं पूरा पाठ्यक्रम केवल पढ़ूंगा, याद नहीं करूंगा। मैं परीक्षा में पाठ्यक्रम स्मरण कर सकूंगा।
किसी भी पाठ्यक्रम को याद रखना असंभव है जिसे आपने अच्छी तरह से याद और अभ्यास नहीं किया है। I.A.S की परीक्षा में जिस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं उनका जवाब देने के लिए विचारों के गहन विश्लेषण की आवश्यकता होती है जो बार-बार अभ्यास करने के बाद ही मुमकिन होता है। यदि आप केवल पाठ्यक्रम पढ़ रहे हैं (याद किए बिना), तो आप निश्चित रूप से अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।

 

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